जदयू और भाजपा का बिहार में गठबंधन हुआ, तब-तब दोनों दलों का बढ़ता रहा वोट प्रतिशत


 Satyakam News | 04/10/2020 4:36 PM


पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा दस साल बाद फिर से एकबार इकट्ठे चुनावी अखाड़े में ताल ठोंकने को तत्पर हैं। दोनों ही दल यह दावा करते रहे हैं कि उनका स्वाभाविक गठबंधन है और दोनों की आपसी समझ भी काफी बेहतर है। एनडीए के दोनों ही प्रमुख दलों को बिहार की जनता भी सिर आंखों पर बिठाती रही है। 

इस चुनाव में जनता इन पर या महागठबंधन के दलों पर मेहरबान होती है, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि जब-जब ये दोनों दल साथ लड़े जदयू का वोट प्रतिशत हर बार बढ़ता चला गया। जदयू का साथ मिलने से 2005 के फरवरी में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव से ही भारतीय जनता पार्टी के भी वोट प्रतिशत में चुनाव-दर-चुनाव इजाफा होता चला गया।  

वर्ष 1994 में जनता दल (जे) समता पार्टी बना था। 1996 के लोकसभा चुनाव से भाजपा और जदयू का बिहार में गठबंधन हुआ। वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों दल पहली बार साथ उतरे। उसके बाद हर चुनाव में दोनों ही दलों को बिहार की जनता का नेह-स्नेह मिलता रहा और बिहार की चुनावी राजनीति में जदयू और भाजपा मजबूत होते चले गए। 2000 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 34 सीटें जीतीं । तब उसने 120 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं भाजपा की झोली में 67 सीटें आईं। 

वर्ष 2005 फरवरी में हुए विस चुनाव में जदयू ने 138 उम्मीदवारे उतारे थे और उसे 57 सीटों पर विजय मिली थी। इस चुनाव में भाजपा के 37 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2005 अक्टूबर में हुए चुनाव में जदयू ने 139 सीटों पर लड़कर 88 सीटें प्राप्त कीं। वहीं भाजपा के 55 प्रत्याशी जीते। वर्ष 2010 में 141 सीटों पर भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाले जदयू ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, इस चुनाव में 102 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा के 91 उम्मीदवारों को जनता ने जीत दिलायी।
 
2015 के चुनाव में जदयू एनडीए गठबंधन से अलग हो गया था। आमने-सामने की लड़ाई में जहां जदयू को 101 सीटों पर लड़कर 71 सीटें मिलीं, वहीं 157 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा को महज 53 सीटों पर जीत मिली थी। 

Follow Us