अब क्या निजाम को ही बदल दें?


 Satyakam News | 18/01/2021 9:31 PM


गत सोमवार 11 जनवरी से मुरैना जिले के सुमावली और बागचीनी थानान्तगर्गत चार गांव में जहरीली शराब पीने से 25 लोग असमय काल के गाल में समा गये। इससे उठे तूफान के जल-जले में प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तत्काल सख्त कदम उठाते हुये प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी जावेद खाॅन सहित दोनों थाने के प्रभारी ,दो सब इंस्पेक्टर व जौरा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) को निलंबित करते हुये जिला कलेक्टर अनुराग  वर्मा व पुलिस कप्तान अनुराग सुजानिया की असमय बली लेते हुये भोपाल मुख्यालय पर वापिस बुलवा लिया। आनन-फानन में तूफान से उठे बंबडर को थामने के लिए नये कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी की नियुक्ति कर दी गई । मगर जैसा की इस तरह की हा-हाकारी दारुण घटनाओं के कहीं घटित होने पर किसी भी सरकार का रटा-रटाया और तकिया कलाम होता है कि अपराधी जितने बड़े रसूखदार हों किसी को भी बक्सा नहीं जायेगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवायी जायेगी। इसके साथ ही अधिकारियों की बदला-बदली और शोक संतृप्त परिवारों के प्रति गहन संवेदनाओं और मुआवजा राशी का वितरण करना ही मुख्य काम होता है। कुछ सख्ती भी बरती जाती है आसपास और जिले के कुछ स्थानों से अवैध शराब को पकड़ना और छोटे-मोटे गरीब शराब माफियाओं के सोसों को पकड़ दाखिल- ए -हवालात करना आदि फिर जैसे ही कुछ समय निकला ढाक के तीन पात। पिछले आठ दिनों से मुरैना में भी कमोवेश यही हालात दोहराये जा रहे हैं और कायदानुसार पूरा खेल खेला जा रहा है। मगर अफसोस, दुखःद और शासन व प्रशासन का नकारापन या फिर सरकारी खौफ का दिवालियापन कि इसे महज सजोंगों का जोग कहा जाये या फिर कुछ और .....?  आमतौर पर इतना बड़ा घटनाक्रम घटने के बाद कुछ महिनों के लिए शासन-प्रशासन और पुलिस के खौफ के  कारण इस तरह के मौत सौदागर शराब माफिया गुण्डे बदमाश कुछ महिनों के लिए अपनी मांदों में दुपक जाते हैं या फिर जिले सीमाओं से विदा ले लेते हैं। 

मगर चम्बल संभाग मुख्यालय मुरैना जिले के शराब ,रेत,खण्डे,व खदान माफिया शासन-प्रशासन व पुलिस के खौफ से कभी अपनी जमीन नहीं छोड़ते बल्कि शासन-प्रशासन और पुलिस का मजाक उड़ाते हुये अपनी बारदातों को अंजाम देकर प्रशासन को चुनौती देते रहते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण सामने है बागचीनी और सुमावली की घटना में जहा मौतों का आकड़ा रोज बढ़ता जा रहा है वहीं गत दिवश ग्रामिणों ने आरोप लगाया है कि शराब माफियों ने दिमनी थानान्तगर्गत छिछावली गांव में जहरीली शराब पिलाकर मौत के हवाले कर दिया जबकि दो लोगों को अत्याधिक  हालत खराब हो जाने के कारण ग्वालियर रिफर कर दिया गया है जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। महज सात दिन में जिले में घटने वाला यह दूसरा दुखःद है मगर पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि दो लोगों की मौत शराब पीने से हुई है मगर उसने शराब माफियाओं के खिलाफ ग्रामिण और मृतक परिवारों की शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही भी नहीं की है। । और वो भी ठी उसी समय जब तब एक तरफ सख्ती के साथ पुलिस सुमावली और बागचीनी कांड के मुख्य आरोपी को चेन्नई में गिरफ्तार करती है उसके छैरा गांव स्थित मकान को बुलडोजर चलाकर नेस्ताबूद करती है तो थाना सिविल लाईन पुलिस एक खेत में चल रही अवैध शराब की चल रही फैक्टरी का भंडाफोड़ करती है हालांकि यह फैक्टरी कोन अपराधी चला रहे थे? ये जानने में नाकाम रहती है। वहीं दूसरी तरफ केन्द्रीय कृषि मंत्री व मुरैना से भाजपा सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर पूरे अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ पूरे दिन जहरीली शराब में मृत 25 लोगों के निज निवासों पर जाकर अपनी और अपनी सरकार की तरफ गहन संवेदना व्यक्त कर उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। जबकि दिमनी थानान्तगर्गत जहरीली शराब पीने से मारे गये छीछावली गांव के 32 वर्षिय सेना के जवान सत्यनारायण पुत्र पंचम सिंह व 25 वर्षिय युवा माताप्रसाद की मौत से आक्रोशित होकर ग्रामिण  दिमनी के बड़ागांव हाइवे पर जवान का शव रखकर चक्काजाम कर रहे थे । ऐसे में सवाल उठता है सात दिन पहले हुये शर्मनाक कांड में क्लेक्टर, एसपी, आबकारी अधिकारी, एसडीपीओ आदि सब बदल कर देख लिये? मगर बावजूद इसके के महज सात दिन में दूसरा शर्मनाक कांड तो क्या अब मप्र के निजाम को   ही बदल दिया जाये? मगर प्रदेश की भोली-भाली और बेबस जनता जानती है इससे भी कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि ये फिर बिकाऊ कांग्रेस के विधायकों दम पर फिर वापिस आ जायेंगे।

श्रीगोपाल गुप्ता

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