24 मौतों पर घड़ियाली आंसू बहाना बंद करे सरकार


 Satyakam News | 16/01/2021 8:55 PM


मुरैना जिले के सुमावली और बागचीनी थानान्तगर्गत चार गांव में जहरीली शराब पीकर मरने वालों की संख्या 24 पर पहुंच गई। अभी भी गंभीर रुप से कई घायल अस्पतालों में गहन चिकित्सक इकाई में उपचारित हैं। इधर जहरीली शराब पीने से लगे लाशों के ठैर से हुई भारी जन छति और किरकरी से गत सोमवार से ही मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह व सरकार सक्रिय हो गये हैं। सरकार ने पहले थाना प्रभारी सहित दो एएसआई और प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित  कर फिर मुरैना जिला कलेक्टर अनुराग वर्मा और पुलिस कप्तान को जिले की सीमा से इतर वापिस मुख्यालय भोपाल बुला लिया साथ ही पुलिस अनुविभागीय अधिकारी को निलंबित कर दिया। हालांकि मुख्यमंत्री के इस कड़े निर्णय से जहरीली शराब पीने से हुई 24 लोगों की आकस्मिक मौतों से गुस्साये उनके परिजन और ग्रामिणों के गुस्से में कुछ राहत मिलती दिखाई दे रही है।मगर उन्हें अब भी न्याय की उम्मीद कुछ धुंधली सी ही दिखाई दे रही है। धुंधली इसलिये की अक्सर देखा गया है कि सत्ता और समय का स्वभाव बन गया है कि कुछ दिन सब कुछ भूल-भुलाकर सब सामान्य हो जायेगा। इस शर्मनाक कांड से मरने वालों के चारो गांवों में डरावना सा सन्नाटा पसर गया है। इस सन्नाटे को चीरने का काम सरकार द्वारा बनाये गए उच्चस्तरीय जांच दल के मुखिया ग्रह विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा व दो सदस्य अत्तिरिक्त पुलिस महानिदेशक अ. वि. ए सांई मनोहर और उप पुलिस महानिरीक्षक ट्रेनिंग मिथलेश शुक्ला ने मृतकों के परिवारों बीच जाकर उनका दुख जानकर किया। जांच दल ने घटना स्थल का मौका-मुआयना किया, तथ्यों की जानकारी ली व मृतक के परिवार और स्थानीय अधिकारियों से 14 व 15 जनवरी दो दिन तक बातचीत करके सबूत  जुटाये। अब जांच दल वापिस चला गया है जो संभवतः एक-दो दिन में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सोंप देगा। रिपोर्ट के आधार आगे की कार्यवाही सरकार करेगी ऐसा जांच दल के मुखिया राजेश राजौरा ने पत्रकारों से भोपाल रवाना के पूर्व कहा। उन्होने यह भी कहा है कि हम अपनी रिपोर्ट में शराब तस्कर व अबैध शराब बनाने वालों को और कड़ी सजा देने के लिए ज्यादा सख्त कानून बनाने की सिफारिश भी कर रहे हैं। मगर उन्होने यह नहीं बताया कि आखिर पूरे मप्र में उज्जैन, बड़वानी, मंदसौर आदि और अब मुरैना में जहरीली शराब पीकर मरने वालों की लाशों के ढैर क्यों लग रहे हैं ? क्या मूल कारण है इसके पीछे है। क्या इस प्रश्न की जड़ में प्रदेश की सरकार ही बैठी हुई है, जिसकी गलत और दोगली आबकारी नीतियों के कारण ही प्रदेश में शराब माफिया लोगों की जान लेने पर उतारु है और सरकार घड़ियाली आंसू बहाने में मग्न है। जो अब उसे बंद कर अपने आबकारी अमले को कसना चाहिए और जरूरत पड़े तो निक्कमे अधिकारीयों को नाप देना चाहिए। 

पूरे विश्व में भारत और भारत में मप्र और मप्र में भी मुरैना जिले में शराब दुनिया में सबसे ज्यादा मंहगी और सहज सुलभ है। मुरैना में आम तौर पर देखा जा सकता है कि रात के दो बजे अगर किसी बीमार को बचाने के लिए दवा चाहिए तो नामुमकिन तो नहीं है मगर मुस्किल बहुत है। यदि आप किसी मेडिकल वाले से परिचित हैं तो उसे जगाकर दवा ले सकते हैं और दूर-दराज किसी गांव से मरीज को लेकर आये हैं तो भगवान पर भरोसा रखकर सुबह तक इंतजार करिये। मगर आपको रात में दो बजे शराब चाहिए तो बिंदास मुरैना की किसी भी देशी शराब की क्लारी पर चले जाइये बंदा हाजीर है आपकी सेवा के लिए। किसी को यकीं हो न हो मगर अल सुबह साढ़े चार -पांच बजे मुरैना की देशी क्लारी नंबर एक के बगल में रेलवे मालगोदाम के फाटक पर नाले के किनारे आपको शराबियों की जमात जाम पर जाम चढ़ाती हुई  खुले आम दिख जायेगी। सिर्फ कागजों में चल रहा और सरकार छाती पर पल रहा सफेद हाथियों का झुंड आबकारी विभाग बता सकता है कि आखिर इतनी अल-सुबह इन शराबियों को शराब कोन परोस रहा है वह भी साठ रुपये क्वार्टर 110 रुपये में ? खुलेआम एमआरपी की धज्जियां  उड़ाते हुये प्रिंट से दोगुनी रकम पर ये सरकारी देशी व अंग्रेजी शराब की दुकानें किस आबकारी विभाग के सरकारी दामाद से मिली भगत पर बिक्री कर रहें हैं? जो बोतल ब्लेंडर प्राईड की अभी तक 1400 रुपये प्रति बोतल थी, इस कांड के बाद मची अफरा-तफरी  में एक हजार रुपये की कर दी गई है, मगर शराब बिक्रेता सिंडीकेट की हठ धर्मी और जिद देखिये देखिये हाफ 700 रुपये की और क्वार्टर 340 रुपये का बेचा जा रहा है। कल तक 60 रुपये में बिकने वाला देशी शराब का क्वार्टर 110 रुपये में बेचा जा रहा है। ऐसे में सस्ती शराब किसको नहीं चाहियेगी? परिणाम चाहे गांव हो, कोई भी तहसील मुख्यालय या फिर खुद संभाग व जिला मुख्यालय मुरैना हो गली-गली में अंग्रेजी शराब पास के राजस्थान के धौलपुर जिले से तस्करी करके लाकर व गांवों में खुले आम नकली शराब की पैकिंग करके होम डिलीवरी इन दुकानों की कीमतों से 30 से लेकर चालीस प्रतिशत कम पर की जा रही है तो देशी शराब तो अब सामने है कि खुले आम खेतों तैयार कर गांव-गांव गली-गली में आधी कीमत पर बिक रही है। असली समस्या यही है कि बढ़ते सरकारी आबकारी करों के कारण अब मुरैना में सरकार की आबकारी नीति नहीं बल्कि सफेद हाथियों और ठेकेदारों की मिली भगत की लूटो-खाओ रणनीति चल रही है। इसलिये सरकार घड़ियाली आंसू बहाना बंद कर मुख्य समस्या दामों की हेराफेरी पर ध्यान दे तो कुछ सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

श्रीगोपाल गुप्ता

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