आगे बहुत लड़ाई है मगर किसानों का जोश हाई है


 Satyakam News | 14/12/2020 10:26 PM


सरकार द्वारा लाए गये तीन कृषि कानूनों के विरोध में पहले पंजाब में दो महीने और अब दिल्ली की कई  सीमाओं पर दो हफ्ते से किसानों का आंदोलन जारी है! तीनों नए कानूनों पर जहां सरकार सरकार इसे किसानों के हित में बताते हुये वापिस न लेने के मूढ़ में है तो किसान इन्हें वापिस कराने की जिद पर अड़े हुये हैं! दोनों के कानूनों को लेकर अपने-अपने दावे हैं, सरकार जहां इन कानूनों को किसानों के हक व उसके फायदे में बताने का लम्बा-लम्बा दावा कर रही है तो किसान इसे अपने और अपनी किसानी पीढ़ी को कोपरेट के ईशारे पर खत्म करने की साजिश करार दे रहे हैं! सरकार यह दावा दिन-रात कर रही है कि इस आंदोलन को कांग्रेस भड़का रही है, वह किसानों को गुमराह कर भोले-भाले किसानों सरकार के खिलाफ कर विकास को अवरुद्ध कर रही है! वहीं साढ़े छह साल के भारतीय जनता पार्टी सरकार के हठधर्मी कार्यकाल को देखते हुए किसान लम्बी लड़ाई के लिए मानस बना चुका हैं! यही कारण है कि किसानों को यह अहसास है कि लड़ाई लम्बी चलनी है इसी लिए आंदोलन को मिल रहे सभी वर्गों से विशाल व व्यापक जन समर्थन से किसानों का जोश हाई है! दरअसल जिस अफरा-तफरी के माहौल में सरकार ने इन तीन विधेयकों को संसद में पारित करवाया विशेषकर राज्यसभा में बिना किसी मत विभाजन के इस पर संदेह के बादल उसी समय छा गए थे! बाकी की कसर सरकार की ढिलाई और उदासीनता ने पूरी कर दी, जब सरकार की जानकारी में था कि उसके कानून पारित कराने के साथ ही पंजाब में विरोध का ज्वालामुखी फूट गया है और किसान सड़कों पर उतर गया है तो उसे उसी समय अपने तीनों कानूनों के पक्ष में अन्नदाताओं को समझा-बुझाकर समाप्त करवा देना चाहिए था! मगर सरकार ने पूरी उदासिनता का परिचय दिया, पंजाब में दो महीने चले आंदोलन में सरकार ने किसी प्रकार की समजाईश का कोई प्रयास नहीं किया!

 बल्कि कृषि मंत्री से बात करने आए किसानों के जत्थों से कृषि मंत्री समय देने के बावजूद मिले भी नहीं और सचिव स्तर के अधिकारियों को आगे कर दिया,जिससे किसान और भड़क गए! धीरे-धीरे पनपता गुस्सा जब विशाल आंदोलन बन कर दिल्ली की दहलीज पर ठोकरे देने लगा तब सरकार जागी और छह चक्र की बातचीत सरकार और किसानों के बीच हो गई! मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग किसानों को सरकार का यह फ़रमान कि तीनों कानूनों में दर्जन भर संशोधनों के लिए सरकार तैयार है मगर कानूनों को वापिस नहीं लेगी! किसानों को यह फरमान और दम व रसद दे गया, अब उनका ये कहना है कि जब सरकार खुद दर्जन भर संशोधनों की बातों को मान रही है तो फिर इन कानूनों में हकीकत में कितनी कमियां होंगी? अतः तीनों क़ानूनों को रद्द कर किसानों के साथ बैठकर पुनः नया कानून लाये! बहरहाल सरकारी अमलों व सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा अपने आंदोलन को खालिस्थानी,आंतकवादियों का जमावड़ा, आंदोलन के लिए 100-100 रुपयों में शाहिनबाग की दादियां उपलब्ध हैं राष्ट्र   विरोधियों का जमघट आदि-आदि घृणित आरोप चस्पा कर देने के बावजूद किसान गुस्से में तो हैं मगर राष्ट्र,जनता व सरकार के प्रति अनुशासासित होकर शांतिप्रिय तरिके से आंदोलित है! सरकार के पिछले रवैये को देखते हुए कहा नहीं जा सकता कि आंदोलन का हस्र क्या होगा? सरकार विन्रमता के साथ कानूनों को वापिस लेगी या फिर थोपने की अपनी चिर-परिचित नीति पर अड़ी रहेगी मगर दिनों -दिन आंदोलन में बढ़ती किसानों की भागीदारी से यह स्पष्ट है कि 
"आगे बहुत लड़ाई है मगर 
किसानों का जोश हाई है "
श्रीगोपाल गुप्ता 

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