ऐतिहासिक मंदिर हड़पने का नोटिस देकर भूला औकाफ


 Satyakam News | 28/11/2020 9:01 PM


मध्य प्रदेश शासन द्वारा संधारित मंदिर श्री प्रियावल्लव जी छीपी गली वृन्दावन मथुरा (उत्तर प्रदेश)  पर अवैध निर्माण और नवीनीकरण व बिला शासन अनुमति के अन्य निर्माण कार्य कराये जाने के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही और अपराधिक प्रकरण दर्ज कराये जाने का आरोपी को नोटिस देकर माफी-औकाफ विभाग भूल गया! उल्लेखनीय है कि देश के कई राज्यों के धार्मिक व महानगरों में अरबों रुपयों के भव्य मंदिर व ईमारतों का निर्माण मप्र के कई पूर्व राजा-महाराजाओं ने जनहित में कराऐ थे! जो आजादी के बाद सन् 1956 में नए बने राज्य राज्य मध्य प्रदेश शासन की सम्पति में समाहित कर दिऐ गऐ थे! देश के विभिन्न राज्यों में फैली  मंदिर व ऐतिहासिक ईमारतों की श्रखंलाओं की देखरेख व संघारन के लिए माफी-औकाफ विभाग को अधिकृत किया गया था! ऐसा ही एक मंदिर भगवान कृष्ण की कर्मभूमि वृन्दावन में मंदिर श्री प्रियावल्लव जी का  निर्माण दतिया के तात्कालीन नरेश राजा किशन सिंह ने आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व कराया था, जिसकी आज अनुमानित कीमत करोड़ों रुपयों में है! मंदिर को हड़पने और शासकिय संपति खुर्द-बुद करने की शिकायत मिलने पर तात्कालीन आयुक्त माफी-औकाफ व ग्वालियर संभाग श्री बीएम शर्मा एंव सचिव मप्र शासन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्य विभाग ने जांच के आदेश दिऐ थे! 

उस पर तात्कालीन माफी अधिकारी ने 14 व 24 दिसंबर 2018 में मंदिर का निरीक्षण किया! अपने निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने पाया कि मंदिर भवन पर लगा मध्यप्रदेश सरकार व निर्माण कर्ता  दतिया नरेश का शिलापट्ट उखाड़ कर गायब कर दिया गया और मंदिर के पिछले भाग के विवादित क्षेत्र पर कब्जा कर मंदिर में किसी ब्रज सेवा ट्रस्ट के द्वारा बिला इजाजत नए निर्माण कार्य करा लिए गए हैं! विभाग ने तात्काल इन करतूतों के विरुद्ध संबधित विष्णु मोहन नागार्च को नोटिस जारी करते हुए अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की चेतावनी देते हुए तात्काल अवैध कब्जा हटाने और शासन संघारित देवस्थान बोर्ड लगाने को कहा! इस नोटिस क्यू/माफी/विविध/2/19 दिनांक 07.06.2019 की  की प्रति क्लेक्टर जिला दतिया की ओर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही के लिऐ प्रेषित की गई थी! मगर आज दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मप्र शासन संघारित देवस्थान का बोर्ड ही दुबारा लगाया गया और न ही अवैध कब्जा मुक्त किया गया है, जबकि विभाग दो वर्ष से मौन है! ऐसी न जाने कितनी कीमती और धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व की संपत्ति पर अवैध कब्जे हो गए हैं, यदि मप्र शासन इस पर ईमानदारी से जांच करवा ले तो आश्चर्यजनक परिणाम और राजनीतिक- अपराधियों और अधिकारियों के नापाक गठजोड़ का खुलासा हो जाएगा!
श्रीगोपाल गुप्ता 

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