निजी शिक्षण संस्थाओं ने शिक्षा मंत्री को भेजा 10 करोड़ की मानहानि का नोटिस


 Satyakam News | 19/11/2020 8:23 PM


जयपुर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्द डोटासरा द्वारा निजी स्कूलों को लेकर कथित तौर पर बोले गए एक आपत्तिजनक शब्द पर निजी स्कूल संचालकों व मंत्री के बीच ठन गई है। दरअसल पिछले दिनों शिक्षा मंत्री गोविन्द डोटासरा ने निजी शिक्षण संस्थाओं को कथित तौर पर ‘धंधा’ कहा था, जिस पर आपत्ति जताते हुए निजी स्कूल संचालकों द्वारा उन्हें दस करोड़ रुपए मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया है।

नोटिस में निजी स्कूलों की ओर से अधिवक्ता ने कहा है कि पिछले दिनों एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान डोटासरा ने स्कूल संचालकों के लिए ‘धंधा’ शब्द उपयोग में लिया। एक बार नहीं बल्कि कई बोला गया। इससे निजी स्कूल संचालकों की समाज में छवि खराब हुई है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्कूल एसोसिएशन (नीसा) की ओर से दिया गया यह नोटिस चंडीगढ़ के अधिवक्ता पंकज मैनी ने भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि पंद्रह दिन के भीतर शिक्षा मंत्री इस शब्द के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे।

उधर, निजी स्कूल संचालकों का फीस को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चल रहा है।  ‘फोरम ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ राजस्थान’ के बैनर तले गैर सरकारी स्कूलों के संचालकों और शिक्षकों का आमरण अनशन जयपुर में बुधवार को नौवें दिन भी लगातार जारी रहा।

प्राइवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि जयपुर में शहीद स्मारक पर एकत्रित हुए 33 जिलों से आए हुए 300 से अधिक पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह फैसला किया है कि यदि 22 नवंबर तक सरकार द्वारा समस्या का कोई समाधान नहीं किया जाता है और वार्ता के लिए नहीं बुलाया जाता है तो शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में प्राइवेट स्कूल संचालकों व शिक्षकों द्वारा बड़ी तादाद में महा पड़ाव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री के सीकर लक्ष्मणगढ़ स्थित आवास के बाहर महापड़ाव के साथ ही धरना दिया जाएगा।

बीकानेर से गए पांच सदस्यीय दल में गिरिराज खैरीवाल, तरविंद्र सिंह कपूर, विपिन पोपली, हरविंद्र सिंह कपूर, मुकेश शर्मा एवं नोखा के महावीर गहलोत, मदनलाल सियाग, ललित पालीवाल एवं देवाराम बाना सम्मिलित थे।

डोटासरा ने निजी स्कूल संचालकों को सलाह दी है कि धरना-प्रदर्शन छोड़कर काम-धंधा करें। क्योंकि इससे समस्या का समाधान नहीं होता। समाधान बातचीत से होता है। बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। अभी मानहानि का कोई नोटिस नहीं मिला है। जब मिलेगा जवाब दे दिया जाएगा।

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